अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) क्या है? झारखंड के कौन-कौन से जिले इसमें आते हैं


भारत के संविधान में आदिवासी क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की गई है।

इसी व्यवस्था के तहत कुछ क्षेत्रों को अनुसूचित क्षेत्र (Scheduled Area) घोषित किया जाता है, जो

Fifth Schedule of the Constitution of India के अंतर्गत आते हैं।

इन क्षेत्रों का प्रशासन सामान्य क्षेत्रों से थोड़ा अलग तरीके से किया जाता है ताकि आदिवासी समाज के अधिकार और संसाधन सुरक्षित रह सकें।

अनुसूचित क्षेत्र क्या होता है

अनुसूचित क्षेत्र वह क्षेत्र होता है जहाँ:

आदिवासी जनसंख्या अधिक होती है

सामाजिक और आर्थिक स्थिति अलग होती है

उनकी परंपराओं और संसाधनों की रक्षा की आवश्यकता होती है

इन क्षेत्रों को घोषित करने का अधिकार भारत के राष्ट्रपति के पास होता है।

झारखंड में अनुसूचित क्षेत्र

भारत के आदिवासी बहुल राज्यों में से एक है

Jharkhand।

झारखंड के कई जिले अनुसूचित क्षेत्र में आते हैं।

मुख्य रूप से ये जिले अनुसूचित क्षेत्र में शामिल हैं:

रांची

खूंटी

गुमला

सिमडेगा

लोहरदगा

पश्चिमी सिंहभूम

सरायकेला-खरसावां

पूर्वी सिंहभूम

लातेहार

दुमका

पाकुड़

साहिबगंज

जामताड़ा

गोड्डा के कुछ क्षेत्र

इन क्षेत्रों में आदिवासी जनसंख्या अधिक होने के कारण विशेष प्रशासनिक प्रावधान लागू होते हैं।

अनुसूचित क्षेत्रों में विशेष व्यवस्था

इन क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण कानून लागू होते हैं, जैसे:

Chotanagpur Tenancy Act, 1908

Santhal Parganas Tenancy Act, 1949

इनका उद्देश्य आदिवासी भूमि और संसाधनों की रक्षा करना है।

क्यों महत्वपूर्ण है अनुसूचित क्षेत्र

अनुसूचित क्षेत्र घोषित होने से:

आदिवासी जमीन की सुरक्षा होती है

परंपरागत व्यवस्था को मान्यता मिलती है

विकास योजनाएँ विशेष रूप से लागू होती हैं

निष्कर्ष

अनुसूचित क्षेत्र आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संवैधानिक व्यवस्था है।

इसे समझना हर आदिवासी समाज के व्यक्ति के लिए जरूरी है, ताकि वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हो सके। जोहार साथियों 

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

ST (अनुसूचित जनजाति) क्या है? कैसे तय होती है ST सूची – संविधान की पूरी प्रक्रिया

UGC का नया प्रावधान: आदिवासी–बहुजन दृष्टि से सच

CNT Act की धारा 46 और 71A – सरल समझ (श्रृंखला – भाग–4)