PESA कानून के तहत ग्राम सभा के 10 सबसे बड़े अधिकार


परिचय

आदिवासी क्षेत्रों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने के लिए

Panchayats (Extension to Scheduled Areas) Act, 1996

लागू किया गया।

यह कानून उन क्षेत्रों में लागू होता है जो

Fifth Schedule of the Constitution of India

के अंतर्गत आते हैं।

इस कानून का उद्देश्य ग्राम सभा को मजबूत बनाना है।

ग्राम सभा के 10 महत्वपूर्ण अधिकार

1️⃣ ग्राम सभा सर्वोच्च संस्था

गाँव से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय ग्राम सभा के माध्यम से लिए जा सकते हैं।

2️⃣ विकास योजनाओं की मंजूरी

गाँव में चलने वाली योजनाओं को ग्राम सभा की मंजूरी जरूरी होती है।

3️⃣ जमीन अधिग्रहण पर राय

यदि किसी परियोजना के लिए जमीन ली जाती है तो ग्राम सभा की राय महत्वपूर्ण होती है।

4️⃣ प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा

ग्राम सभा जंगल, जल और जमीन की रक्षा के लिए निर्णय ले सकती है।

5️⃣ परंपरागत व्यवस्था की रक्षा

आदिवासी परंपराओं और सामाजिक व्यवस्था को ग्राम सभा मान्यता देती है।

6️⃣ स्थानीय बाजारों का नियंत्रण

ग्राम सभा स्थानीय हाट-बाजार के संचालन में भूमिका निभा सकती है।

7️⃣ शराब नियंत्रण

ग्राम सभा गाँव में शराब की बिक्री या उपयोग को नियंत्रित करने का निर्णय ले सकती है।

8️⃣ खनिज संसाधनों पर निगरानी

छोटे खनिज संसाधनों के उपयोग में ग्राम सभा की भूमिका हो सकती है।

9️⃣ सामाजिक न्याय

ग्राम सभा स्थानीय विवादों के समाधान में भी भूमिका निभा सकती है।

🔟 विकास कार्यों की निगरानी

ग्राम सभा यह देख सकती है कि योजनाएँ सही तरीके से लागू हो रही हैं या नहीं।

निष्कर्ष

PESA कानून ग्राम सभा को मजबूत बनाकर आदिवासी समाज को अपने संसाधनों और विकास पर नियंत्रण देने का प्रयास करता है।

यदि ग्राम सभा सक्रिय हो जाए तो आदिवासी समाज अपने अधिकारों की रक्षा अधिक प्रभावी तरीके से कर सकता है।

✊ मजबूत ग्राम सभा ही मजबूत आदिवासी समाज की पहचान है।

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