पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में राज्यपाल की शक्तियाँ क्या हैं?


परिचय

भारत के संविधान में आदिवासी क्षेत्रों की सुरक्षा और प्रशासन के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।

इन्हीं प्रावधानों में से एक है

Fifth Schedule of the Constitution of India।

पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रों में राज्यपाल को विशेष प्रशासनिक शक्तियाँ दी गई हैं ताकि आदिवासी समाज के हितों की रक्षा की जा सके।

राज्यपाल की मुख्य शक्तियाँ

1️⃣ कानून में संशोधन की शक्ति

राज्यपाल यह तय कर सकते हैं कि राज्य का कोई कानून अनुसूचित क्षेत्रों में लागू होगा या नहीं, या उसमें बदलाव किया जा सकता है।

2️⃣ विशेष नियम बनाने की शक्ति

राज्यपाल अनुसूचित क्षेत्रों के लिए विशेष नियम बना सकते हैं।

3️⃣ जमीन की सुरक्षा

राज्यपाल ऐसे नियम बना सकते हैं जिससे आदिवासी जमीन की रक्षा हो सके।

4️⃣ सामाजिक और आर्थिक संरक्षण

राज्यपाल ऐसे प्रावधान बना सकते हैं जिससे आदिवासी समाज के हित सुरक्षित रहें।

5️⃣ सलाहकार परिषद की भूमिका

राज्यपाल को आदिवासी मामलों में सलाह देने के लिए

Tribes Advisory Council

का गठन किया जाता है।

यह व्यवस्था क्यों बनाई गई

संविधान निर्माताओं का मानना था कि आदिवासी क्षेत्रों की परिस्थितियाँ अलग हैं।

इसलिए उनके प्रशासन के लिए विशेष व्यवस्था होना जरूरी है ताकि उनके संसाधन और संस्कृति सुरक्षित रह सकें।

निष्कर्ष

पाँचवीं अनुसूची के तहत राज्यपाल को दी गई शक्तियाँ आदिवासी समाज की सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं।

लेकिन इन शक्तियों का सही उपयोग तभी संभव है जब समाज जागरूक हो और अपने अधिकारों को समझे।

✊ संविधान ने अधिकार दिए हैं, उन्हें समझना और बचाना समाज की जिम्मेदारी है।

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