CNT Act और पाँचवीं अनुसूची का संबंध (भाग–8)


प्रस्तावना

Chotanagpur Tenancy Act, 1908 छोटानागपुर की भूमि सुरक्षा का प्रमुख कानून है।

लेकिन सवाल यह है —

क्या यह केवल एक राज्य कानून है?

या इसकी जड़ें भारत के संविधान में भी जुड़ी हैं?

पाँचवीं अनुसूची क्या है?

भारत के संविधान में

Fifth Schedule of the Constitution of India

अनुसूचित क्षेत्रों (Scheduled Areas) के प्रशासन और संरक्षण से संबंधित विशेष प्रावधान देती है।

इसका उद्देश्य है:

आदिवासी भूमि और संसाधनों की रक्षा

प्रशासन में विशेष व्यवस्था

परंपरागत संरचना का सम्मान

CNT Act और पाँचवीं अनुसूची का संबंध

1️⃣ CNT Act भूमि हस्तांतरण को नियंत्रित करता है।

2️⃣ पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों को संवैधानिक सुरक्षा देती है।

3️⃣ झारखंड के अधिकांश CNT क्षेत्र पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत आते हैं।

इसका मतलब:

CNT Act केवल राज्य का साधारण कानून नहीं,

बल्कि संवैधानिक ढाँचे से जुड़ा हुआ संरक्षण तंत्र है।

राज्यपाल की विशेष भूमिका

पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत:

राज्यपाल को विशेष शक्तियाँ दी गई हैं

वे अनुसूचित क्षेत्रों के लिए नियमों में संशोधन या रोक लगा सकते हैं

जनजातीय सलाहकार परिषद (Tribal Advisory Council) से परामर्श आवश्यक होता है

यह संरचना भूमि सुरक्षा को अतिरिक्त संवैधानिक परत देती है।

क्या व्यवस्था ज़मीन पर प्रभावी है?

यही सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है।

कानून और संविधान दोनों सुरक्षा देते हैं,

लेकिन:

क्या प्रशासन सही ढंग से लागू कर रहा है?

क्या अवैध भूमि हस्तांतरण रुक पाया है?

क्या ग्राम स्तर पर जागरूकता है?

इन सवालों पर गंभीर चर्चा आवश्यक है।

निष्कर्ष

CNT Act और पाँचवीं अनुसूची मिलकर

आदिवासी भूमि सुरक्षा का दोहरा ढाँचा बनाते हैं —

एक कानूनी,

दूसरा संवैधानिक।

लेकिन वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है

कि इन्हें ईमानदारी से लागू किया जाए !

🔜 अगले भाग (भाग–9) में

हम चर्चा करेंगे:

CNT Act में भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया, अनुमति प्रणाली और किन परिस्थितियों में भूमि ट्रांसफर वैध या अवैध माना जाता है।

यह भाग थोड़ा गंभीर और विश्लेषणात्मक है —

आपकी श्रृंखला अब गहराई में जा रही है।

जोहार 

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