सवाल पूछना अपराध नहीं होता”


आज के समय में सबसे ख़तरनाक बात यह हो गई है कि
सवाल पूछने वाले को ही कटघरे में खड़ा कर दिया जाता है।
जब कोई छात्र पूछता है —
मेरी शिकायत क्यों नहीं सुनी गई?
मेरे साथ भेदभाव क्यों हुआ?
नियम सबके लिए बराबर क्यों नहीं?
तो जवाब मिलने की जगह उसे कहा जाता है —
 👉 “तुम ज़्यादा सवाल करते हो।”
लोकतंत्र में चुप रहना आदर्श नहीं है।
सवाल करना नागरिक का अधिकार है।
इतिहास गवाह है — जो समाज सवाल करना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे अपने अधिकार भी खो देता है।
संविधान हमें सिखाता है:
सहमति ज़रूरी नहीं
सम्मान ज़रूरी है
और सवाल पूछने की आज़ादी ज़रूरी है
✊ इसलिए आज ज़रूरत इस बात की है कि
हम डरें नहीं,
नफरत न फैलाएँ,
बस तर्क के साथ सवाल पूछते रहें।
❓ आज का सवाल
क्या सवाल पूछने से व्यवस्था कमज़ोर होती है,
या सवालों से ही व्यवस्था मज़बूत होती है?

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