भाग–2 : PESA अधिनियम 1996 — क़ानून बना, शक्ति नहीं आई
भाग–2 : PESA अधिनियम 1996 — क़ानून बना, शक्ति नहीं आई
1996 में संसद ने PESA अधिनियम (Panchayats Extension to Scheduled Areas Act) बनाया।
उद्देश्य साफ़ था—
👉 आदिवासी क्षेत्रों में ग्राम सभा को सर्वोच्च सत्ता देना।
👉 जल–जंगल–ज़मीन पर स्थानीय समुदाय का अधिकार सुनिश्चित करना।
लेकिन आज, 25+ साल बाद सवाल वही है—
क्या PESA ने आदिवासी समाज को वास्तविक शक्ति दी?
PESA 1996 की मूल भावना क्या थी?
संविधान के अनुच्छेद 243M के तहत पाँचवीं अनुसूची क्षेत्रों में अलग व्यवस्था बनाई गई।
PESA ने कहा:
ग्राम सभा ही मूल इकाई होगी
प्राकृतिक संसाधनों पर पहला अधिकार स्थानीय लोगों का होगा
बाहरी हस्तक्षेप सीमित होगा
काग़ज़ पर सब सही था। ज़मीन पर कहानी अलग निकली।
PESA 1996 की प्रमुख कमियाँ
1️⃣ ग्राम सभा को ‘अंतिम निर्णय’ का अधिकार नहीं
PESA कहता है:
ग्राम सभा से परामर्श लिया जाएगा
❌ लेकिन कहीं नहीं लिखा कि
ग्राम सभा का निर्णय बाध्यकारी (Binding) होगा।
➡️ नतीजा:
प्रशासन ग्राम सभा की बात सुनकर भी अनदेखा कर देता है
सहमति केवल “रजिस्टर में हस्ताक्षर” बनकर रह जाती है
2️⃣ ‘परामर्श’ शब्द सबसे बड़ा धोखा
कानून में “Consultation” शब्द का प्रयोग किया गया,
लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि:
यदि ग्राम सभा मना करे तो क्या होगा?
परियोजना रुकेगी या नहीं?
➡️ इसी अस्पष्टता का फायदा उठाकर
खनन, बांध और उद्योग थोपे गए।
3️⃣ संसाधनों पर अधिकार स्पष्ट नहीं
PESA में कहा गया:
लघु वन उपज पर अधिकार
जल स्रोतों का संरक्षण
❌ पर यह नहीं बताया गया कि:
नियंत्रण किसका होगा?
वन विभाग या ग्राम सभा?
➡️ नतीजा:
FRA के बावजूद वन विभाग हावी रहा।
4️⃣ प्रशासनिक ढांचा वही पुराना
PESA ने:
आदिवासी स्वशासन की बात की
लेकिन
❌ अलग प्रशासनिक संरचना नहीं बनाई
➡️ आज भी:
BDO, CO, DC ही निर्णायक हैं
ग्राम सभा सलाहकार बनकर रह गई
5️⃣ उल्लंघन पर कोई सज़ा नहीं
सबसे खतरनाक कमी 👇
❌ PESA में यह नहीं लिखा कि:
ग्राम सभा के अधिकार तोड़ने पर
अधिकारी / कंपनी को
क्या सज़ा मिलेगी?
➡️ बिना दंड के कानून
सिर्फ़ अपील बनकर रह जाता है।
झारखंड में PESA क्यों असफल रहा?
राज्य बनने के बाद भी नियम नहीं बनाए गए
1996 का कानून 2024–25 तक अधूरा रहा
जब नियम आए भी, तो
👉 प्रशासन-केंद्रित रहे, ग्राम सभा-केंद्रित नहीं
सबसे बड़ा सवाल
❓ क्या PESA आदिवासी स्वशासन का औज़ार है
या
❓ सिर्फ़ संवैधानिक दिखावा?
जब तक:
ग्राम सभा सर्वोच्च नहीं होगी
निर्णय बाध्यकारी नहीं होगा
उल्लंघन पर सज़ा नहीं होगी
👉 PESA सिर्फ़ क़ानून रहेगा, सत्ता नहीं बनेगा।
भाग–3 में क्या आएगा?
👉 झारखंड PESA नियम 2024–26 की वास्तविक कमियाँ
👉 क्या बदला और क्या नहीं बदला
👉 आदिवासी समाज के लिए खतरे क्रमशः....(भाग–3 में जारी रहेगा क)
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