मिसयूज़ का डर या जवाबदेही का डर?
जब भी दलित, आदिवासी और OBC छात्रों की
सुरक्षा और सम्मान की बात होती है,
सबसे पहले “मिसयूज़” का डर दिखाया जाता है।
लेकिन सच यह है—
FIR सज़ा नहीं होती,
आरोप दोष सिद्ध नहीं होता,
फैसला हमेशा सबूत के आधार पर ही होता है।
तो फिर सवाल उठना ज़रूरी है—
कानून से डर है
या जवाबदेही से?
❓ सवाल:
क्या शिक्षा संस्थानों में
भेदभाव ज़्यादा ख़तरनाक है
या जवाबदेही?
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