चुनाव के दिन सिस्टम चलता है, बाकी दिनों में क्यों नहीं?

यह सवाल किसी एक व्यक्ति का नहीं है।
यह उस समाज की आवाज़ है जो लोकतंत्र में बराबरी से वोट देता है,
लेकिन विकास में बराबरी नहीं पाता।
चुनाव के दिन सरकार और प्रशासन
आख़िरी गाँव, आख़िरी घर और आख़िरी मतदाता तक पहुँच जाते हैं।
सुरक्षा बल, कर्मचारी, मशीनें, व्यवस्थाएँ — सब कुछ पहुँचता है।
फिर चुनाव के बाद वही व्यवस्था क्यों ग़ायब हो जाती है?
चुनाव के दिन सिस्टम क्यों चलता है?
चुनाव यह साबित करता है कि
सिस्टम सक्षम है।
सड़क न होने के बावजूद कर्मचारी पहुँचते हैं,
जंगल और पहाड़ पार होते हैं,
सुदूर क्षेत्रों में मतदान केंद्र बनते हैं।
इसका मतलब साफ़ है —
जब राजनीतिक इच्छाशक्ति होती है,
तो व्यवस्था वहाँ पहुँच सकती है।
फिर साल भर वही सिस्टम क्यों नहीं पहुँचता?
यही सबसे बड़ा सवाल है।
स्कूल, अस्पताल, एम्बुलेंस,
शिक्षक, डॉक्टर, सार्वजनिक परिवहन —
ये सब चुनाव से कहीं ज़्यादा ज़रूरी हैं।
लेकिन इन्हें पहुँचाने में
सरकारें या तो असफल रहती हैं
या इच्छुक नहीं दिखतीं।
वोट लिया जाता है, सुविधा क्यों नहीं?
18 वर्ष पूरा करते ही
हर व्यक्ति से वोट लिया जाता है।
आदिवासी और सुदूर क्षेत्रों के लोग
पूरे अधिकार से मतदान करते हैं।
लेकिन बदले में उन्हें क्या मिलता है?
न बराबर की शिक्षा,
न स्वास्थ्य सुविधा,
न स्थानीय रोज़गार।
लोकतंत्र अगर केवल वोट तक सीमित रह जाए,
तो वह लोकतंत्र नहीं,
केवल व्यवस्था का भ्रम बन जाता है।
पलायन: विकास नहीं, विफलता
अगर जल–जंगल–ज़मीन वाले क्षेत्रों में ही
मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध हों,
तो कोई भी व्यक्ति
अपना घर, समाज और संस्कृति छोड़कर
शहर नहीं जाना चाहेगा।
पलायन किसी उपलब्धि का संकेत नहीं है।
यह प्रशासनिक और राजनीतिक विफलता का प्रमाण है।
शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए शहर क्यों?
यह प्रश्न सरकार से सीधा है —
जब संविधान समान अवसर की बात करता है,
तो शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए
आदिवासी बच्चों और परिवारों को
शहर क्यों जाना पड़ता है?
क्या सुविधाएँ केवल
शहरी नागरिकों के लिए ही बनी हैं?
जल–जंगल–ज़मीन और अधिकार
आदिवासी समाज विकास विरोधी नहीं है।
वह केवल यह चाहता है कि
विकास उसकी सहमति,
उसकी संस्कृति
और उसके अधिकारों के साथ हो।
विकास का मतलब
विस्थापन नहीं,
बल्कि सम्मान के साथ आगे बढ़ना होना चाहिए।

अगर चुनाव के दिन सिस्टम आख़िरी गाँव तक पहुँच सकता है,
तो शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार वहाँ तक क्यों नहीं पहुँचते?
आप क्या सोचते हैं?

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