ग्राम सभा: काग़ज़ों में शक्ति, ज़मीन पर बेबसी क्यों?
आदिवासी समाज की आत्मा ग्राम सभा में बसती है।
यह केवल एक बैठक नहीं,
बल्कि सामूहिक विवेक, सहमति और स्वशासन की परंपरा है।
कानून कहता है कि
ग्राम सभा की अनुमति के बिना
आदिवासी क्षेत्र में
ज़मीन अधिग्रहण, खनन या परियोजना नहीं हो सकती।
लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी कहती है।
अक्सर ग्राम सभा को
केवल औपचारिकता बना दिया जाता है।
फैसले पहले हो जाते हैं,
और सहमति बाद में काग़ज़ों पर ली जाती है।
जब ग्राम सभा कमजोर की जाती है,
तो आदिवासी समाज की आवाज़ भी दबाई जाती है।
और जब आवाज़ दबती है,
तो अधिकार स्वतः खत्म होने लगते हैं।
ग्राम सभा को मज़बूत करना
क्या आपके गाँव में ग्राम सभा स्वतंत्र रूप से फैसले ले पा रही है?
हाँ या नहीं — और क्यों?
हाँ या नहीं — और क्यों?
किसी सरकार के खिलाफ़ जाना नहीं है,
बल्कि संविधान की आत्मा को जीवित रखना है।
आज ज़रूरत है कि
हर गाँव में लोग यह जानें कि
ग्राम सभा उनका अधिकार है,
उनकी शक्ति है,
और उनका भविष्य है।
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