कुर्मी को ST (अनुसूचित जनजाति) में क्यों शामिल नहीं किया गया? संविधान और इतिहास क्या कहते हैं


कई लोग यह दावा करते हैं कि कुर्मी पहले आदिवासी थे, इसलिए उन्हें ST सूची में शामिल किया जाना चाहिए।

लेकिन सच क्या है?

क्या संविधान इसकी अनुमति देता है?

क्या 1950 की ST सूची में कुर्मी का नाम था?

इन सभी सवालों को समझने के लिए हमें इतिहास, संविधान और ST सूची के नियमों को स्पष्ट रूप से समझना होगा।

📖 मुख्य बात

1️⃣ ST सूची कैसे बनती है

भारत में अनुसूचित जनजातियों की सूची भारत के राष्ट्रपति द्वारा जारी की जाती है।

यह सूची पहली बार 1950 में जारी हुई थी जिसे

The Constitution (Scheduled Tribes) Order, 1950 कहा जाता है।

इस आदेश में हर राज्य की जनजातियों की सूची दी गई थी।

2️⃣ बिहार (जिसमें वर्तमान झारखंड शामिल था) की ST सूची

1950 में जो ST सूची बनी थी उसमें कई जनजातियों के नाम थे जैसे:

मुंडा

उरांव

संथाल

हो

खड़िया

बिरहोर

असुर

पहाड़िया

लेकिन उस सूची में कुर्मी का नाम नहीं था।

3️⃣ ST बनने के लिए क्या मापदंड होते हैं

किसी भी जाति को ST में शामिल करने के लिए कुछ विशेष मानदंड माने जाते हैं जैसे:

आदिम जनजातीय विशेषताएँ

विशिष्ट संस्कृति

भौगोलिक अलगाव

सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन

मुख्य समाज से कम संपर्क

इन्हीं मानकों के आधार पर जनजातियों को ST सूची में रखा गया।

4️⃣ कुर्मी को ST में क्यों नहीं रखा गया

इतिहास और सरकारी रिपोर्टों के अनुसार:

कुर्मी मुख्य रूप से कृषि आधारित जाति मानी जाती है

उनकी सामाजिक संरचना मुख्यधारा समाज से जुड़ी हुई है

जनजातीय जीवन शैली और सांस्कृतिक अलगाव के मानदंडों में वे फिट नहीं होते

इसलिए उन्हें ST सूची में शामिल नहीं किया गया।

📌 निष्कर्ष

सच्चाई यह है कि:

1950 की ST सूची में कुर्मी का नाम नहीं था

संविधान के निर्धारित मानदंडों के आधार पर ही ST सूची बनाई गई थी

इसलिए केवल ऐतिहासिक दावा करने से कोई जाति ST नहीं बन सकती

इस विषय को समझना जरूरी है ताकि समाज में फैल रही गलतफहमियों को दूर किया जा सके।

✊ जानकारी ही अधिकार की ताकत है।

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