1950 में ST सूची क्या थी? बिहार (वर्तमान झारखंड) की मूल जनजातियाँ

 1950 में ST सूची क्या थी? बिहार (वर्तमान झारखंड) की मूल जनजातियाँ

भारत में अनुसूचित जनजाति (ST) की आधिकारिक पहचान पहली बार 1950 में हुई।

जब राष्ट्रपति द्वारा

The Constitution (Scheduled Tribes) Order, 1950

जारी किया गया।

इसी आदेश के माध्यम से हर राज्य के लिए अलग-अलग ST समुदायों की सूची तय की गई।

उस समय झारखंड अलग राज्य नहीं था, बल्कि बिहार का हिस्सा था। इसलिए वर्तमान झारखंड की जनजातियाँ भी उसी समय बिहार की ST सूची में शामिल की गई थीं।

बिहार (जिसमें वर्तमान झारखंड शामिल था) की प्रमुख ST जनजातियाँ

1950 की सूची में जिन प्रमुख जनजातियों को शामिल किया गया, उनमें शामिल थे:

संथाल (Santhal)

उरांव / कुरुख (Oraon / Kurukh)

मुंडा (Munda)

हो (Ho)

खड़िया (Kharia)

बिरहोर (Birhor)

असुर (Asur)

बिरजिया (Birjia)

पहाड़िया समूह

कोरवा

लोहरा

ये वे समुदाय थे जिन्हें ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक आधार पर जनजातीय समुदाय माना गया।

महत्वपूर्ण बात

ST सूची इतिहास, संस्कृति और सामाजिक संरचना के आधार पर तय की गई थी।

यह केवल आर्थिक पिछड़ेपन के आधार पर नहीं बनाई गई थी।

इसलिए हर पिछड़ा समुदाय ST सूची में शामिल नहीं होता।

क्या ST सूची में बदलाव संभव है?

हाँ, लेकिन इसकी प्रक्रिया बहुत स्पष्ट है।

आधार है:

Article 342 of the Constitution of India

इसमें बदलाव केवल संसद के कानून से ही हो सकता है।

निष्कर्ष

1950 की ST सूची भारत में जनजातीय पहचान की आधिकारिक शुरुआत थी।

उसी सूची के आधार पर आज भी ST समुदायों की पहचान की जाती है।

📖 अगले भाग में हम समझेंगे:

ST में शामिल करने के लिए किन मानकों (criteria) पर विचार किया जाता है, और सरकार किन बातों को देखती है।

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